सोचता हूँ, क्या भूल हुई,

कुछ सालों वर्षों पहले |

तू यूँ ही कैसे भूल गया,

कुछ लम्हे अरसों पहले ||

हम यूँ ही खेला करते थे,

इन खेतों खलियानों में |

कभी आम की डालियों में,

कभी नदी और नालों में ||

खाते देख छड़ी तुझको,

तू भी चुप चुप रोता था |

भूखे तेरे होने पे,

मैं भी भूखा सोता था ||

तू अकस्मात् ही छोड़ गया,

मुझे बिना किसी आशा के |

तू मेरी दोस्ती तोड़ गया,

बिना किसी परिभाषा के ||

लगता है, बिता हो  सब कुछ,

कुछ लम्हों पलकों पहले |

तू यूँ कैसे छोड़ गया,

कुछ सालों वर्षों पहले |

तू यूँ ही कैसे रूठ गया,

कुछ लम्हों अरसों पहले ||

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